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साहिब : उम्र महज नौ साल पर इनकी प्रतिभा का कोई जोड़ नहीं

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04‘होनहार वीरवान के होत चिकने पात’….प्रतिभावान बच्चों के लक्षण उसकी कम उम्र से ही दिखने लगते हैं, जिस उम्र में बच्चे मां-बाप की उंगली पकड़कर चलना सीख रहे होते हैं उसी उम्र में कुछ बच्चे अपनी विलक्षण प्रतिभा से कुछ ऐसे कार्य करते हैं कि पूरा समाज हतप्रभ रह जाता है। आज हम बात कर रहे हैं ऐसे ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी जिन्होंने महज नौ साल की उम्र में ही अपने हुनर और एक्टिंग से एक अलग पहचान बना ली है। नवीं मुम्बई में जन्में साहिब (प्रभ मेहर सिंह अरोरा) इस समय दिल्ली पब्लिक स्कूल में कक्षा 4 के छात्र हैं। स्कूल और रंगमंच के बीच सामंजस्य स्थापित करते हुए साहिब ने महज नौ वर्ष की उम्र में रुपहले पर्दे पर अपने को जो स्थापित करने का प्रयास किया वह अनुकरणीय है। बाल कलाकार साहिब से अवेयर टाइम्स के समाचार सम्पादक रजनीश कुमार से हुई बातचीत के कुछ अंश।

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रजनीश : कौन-कौन से विज्ञापनों या सीरियलों के लिए आपने काम किया है या कर रहे हैं?

साहिब : मैने प्रीति जिंटा और सनी देयोल के साथ ‘संतूर माउथ फ्रेशनर’, दिव्या दत्ता के साथ ‘स्मार्ट ट्यूटर’, श्री अल्ट्राटेक सीमेंट, सहारा क्यू मिनरल वाटर, यिप्पी नूडल्स और ‘सावधान इंडिया’, ‘हमारी सिस्टर दीदी’ के अलावा कई धारावाहिक में काम करने के साथ-साथ रेडियो मधुवन पर भी काम कर रहे हैं।

रजनीश : क्या कोई फिल्म में भी आपने काम किया है?

साहिब : हां, एक शार्ट फिल्म पर काम कर रहा हूं, जो एक स्कूल प्रिंसिपल और शिक्षक पर आधारित है। जिसमें प्रिंसिपल हमेशा शिक्षकों की गलतियां निकालने के साथ-साथ उन्हें स्कूल से बाहर करने की धमकियां देता रहता है। इस फिल्म में मुख्य रूप से प्रशासनिक तौर पर होने वाले ऐसे व्यवहारों से शिक्षकों पर पडऩे वाले मनोवैज्ञानिक प्रभाव को दर्शाया गया है।

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रजनीश : पढ़ाई और पर्दे पर काम… दोनों आप कैसे मैनेज करते हैं?

साहिब : मेरे सभी कामों में मेरी मां की भूमिका महत्वपूर्ण है। वो मेरी मां के साथ-साथ मेरी गुरु और मार्गदर्शक भी हैं। मेरी मां मुझे अपने साथ स्कूल ले जाती हैं और वहां से लाती भी हैं। विज्ञापनों या रंगमंच पर काम करने में मेरी मां एक अच्छी करियर मार्गदर्शक हैं, जो मुझे बेहतर मार्ग चुनने के लिए हमेशा प्रेरणा देती रहती हैं। इतनी कम उम्र में आज मैं जिस मुकाम पर हूं उसमें मेरे परिवार का ही योगदान है।

रजनीश : आप किस कलाकार को अपना आदर्श मानते हैं?

साहिब :  मैं अमिताभ बच्चन को अपना आदर्श मानता हूं। मुझे अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘भूतनाथ’ काफी पसंद है, उसमें उन्होंने बच्चों के साथ काम किया है। मैं अमिताभ जी के साथ फिल्म में काम करना चाहूंगा।

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रजनीश : आपके माता-पिता क्या करते हैं?

साहिब : मेरी मां रनवीर कौर और पिता बलजीत सिंह हैं। मेरी मां मेरे ही स्कूल (दिल्ली पब्लिक स्कूल) में शिक्षिका हैं, जबकि मेरे पिता इस समय राजस्थान में नौकरी कर रहे हैं। मेरा पूरा परिवार नवी मुम्बई में रहता है। मेरा जन्म भी यहीं हुआ है और हम लोग यहीं के रहने वाले हैं।

रजनीश : आपकी मां स्कूल, घर और रंगमंच के कार्यक्रमों के मध्य समय का कैसे समायोजन करती हैं?

साहिब : साहिब ने अपनी मां को फोन देते हुए बात करने को कहा। साहिब की मां ने बताया कि बचपन से ही मैं उसके अंदर के कलाकार को देखती थी, जब साहिब को मौका मिला तो वह पहले छोटे-छोटे विज्ञापनों के लिए काम किया। स्कूल और रंगमंच के बीच की कड़ी मैं हूं। स्कूल का भी मेरे साथ सदैव सहयोगात्मक रवैया रहा है, क्योंकि इसी स्कूल (दिल्ली पब्लिक स्कूल) में मैं भी शिक्षिका हूं। स्कूल प्रबंधन मेरे बेटे के हुनर की कद्र करता है और हमेशा एक परिवार की भांति सहयोग करता रहता है, जिस कारण मुझे आने-जाने में कोई दिक्कत नहीं होती है।

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