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योगी सरकार के लिए आसान नहीं होगा इन 5 बड़ी बुराइयों से निपटना

yogiलखनऊ. योगी सरकार के सौ दिन पूरे हो गए हैं। इस सौ दिन में सरकार ने क्या किया इसकी वह बखान कर रही है। किसी भी सरकार के काम काज का आंकलन सौ दिन में नहीं किया जा सकता है। सरकार को अभी कुछ और दिन देने की जरूरत है। योगी सरकार के सामने कुछ ऐसी चुनौतियों से जिससे निपटना उनके लिए आसान नहीं होगा। इन चुनौतियों से निपटना योगी सरकार के लिए काफी मुश्किल पड़ सकता है। ये वह चुनौतियों हैं जिनसे किसी भी सरकार को निपटने के लिए दृढ़ इच्छा शक्ति की जरूरत है।

अवैध खनन का कालाधंधा
यूपी में अवैध खनन का बड़े पैनाने पर काला व्यापार है। सूबा में लंबे समय से अवैध खनन की समस्या से जूझ रहा है। हमीरपुर, बांदा, बुंदेलखंड जैसे जिले इसके उत्पीडऩ के शिकार रहे हैं। जिस किसी ने इस कालेधंधे के खिलाफ आवाज उठाई है उसकी आवाज हमेशा-हमेशा के लिए दबा दी गई। यहां के लोगों की मानें तो उनका कहना है यह सब पुलिस की शह पर होता है। हालांकि योगी सरकार आने के बाद पुलिस ने जो ढील पहले दे रखी थी वह अब नहीं नजर आती, पुलिस अब शक्ति से पेश आती है। जाहिर सी बात है जब सत्ता परिवर्तन हुआ है तो काफी कुछ बदलाव भी दिख रहा है। पुलिस भी कड़ाई बरत रही है और डटकर अवैध खनन करने वालों को खदेडऩे में लगी है। मगर जमीनी हकीकत तो ये है कि यह समस्या केवल इतने प्रयासों से नहीं निपटने वाली है। तभी तो आज भी इन्हीं इलाकों से गिट्टी और मौरंग लदे ट्रक और ट्रॉली बेधड़क निकलते हैं और पुलिस देखती रह जाती है।

सांप्रदायिक दंगों का इतिहास
हमारा देश विविधताओं से भरा है। यहां कई संस्कृतियां, कई रिवाज़ और कई प्रथाएं भी है। एक कहावत है कि एक कोस पर लोगों की बोली बदल जाती, रिवाज़ बदल जाता है। इतनी विविधताओं के बावजूद भी हम एक हैं। लेकिन देश में कई बार ऐसे मौके आए हैं जब हमारी एकता पर किसी ने बुरी नजऱ लगाने की कोशिश की है और वे अपने मक़सद में सफ़ल भी हो गए हैं। आज़ादी से पहले और आज़ादी के बाद देश में कई दर्दनाक दंगे हुए जिनमें सबसे अधिक यूपी में ही दंगे भड़के हैं। योगी सरकार के सामने इस बड़ी समस्या से निपटना आसान नहीं होगा।

यह इसलिए कहा जहा रहा क्योंकि सीएम बनने से पहले योगी आदित्यनाथ की छवी एक कट्टर हिंदूवादी नेता की रही है। उनके अपने खि़लाफ़ जो आपराधिक मामले हैं, उनका क्या होगा? योगी और उनकी हिंदू युवा वाहिनी के खि़लाफ़ राज्य में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने के कई मामले हैं। योगी पर गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर 2007 में भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा। उन पर 12 जि़लों में दंगे भड़काने का आरोप लगा। मगर अब एक दशक होने जा रहा है। मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। वहीं प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद अब तक कई छिटपुट घटनाओं के अलावा सहारनपुर जैसा बड़ा दंगा भी सामने आ चुका है। यह योगी सरकार की विफलता को दर्शाता है।

महिला सुरक्षा और बेरोजगारी
सीएम योगी आदित्यनाथ यूपी में कानून-व्यवस्था ठीक होने के चाहे जितने दावे कर लें, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां करते हैं। स्थितियां बता रही हैं कि सब कुछ सही चलाना मुश्किल है। यहां के लगभग हर जिले में प्रतिदिन कोई न कोई महिला अत्याचार की सूचनायें जरूर सामने आती हैं। महिलाएं आज भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं। आज भी बलात्कार की घटनाएं, महिलाओं के साथ अत्याचार की घटनाएं रोजना हो रही हैं।

बेरोजगारी
सूबे में बेरोजागारी कम नहीं हो पा रही है। यही कारण है कि यहां के लोग रोजगार के लिए महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात जैसे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। सबसे बड़ी बात यहां के गांव में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। बड़ी संख्या में यूपी के छोटे रोजगार भी बंद होते जा रहे हैं। हालही में सूबे में कई बूचडख़ाने एक ही झटके में बंद कर दिए गए जिसके कारण हजारों लोग सड़क पर आ गए। उनके रोजगार का साधन छिन गया, जिसका विरोध भी व्यापक स्तर पर हुआ। सरकार की ओर से इस दिशा में कोई सही कार्रवाई होनी चाहिए थी जो कि अभी तक नहीं हुई है। जबकि प्रदेश सरकार यह दावा कर रही है कि यूपी में युवाओं के रोजगार के लिए नई नीतियां निर्धारित की गई हैं जो ज्यादा से ज्यादा रोजगार मुहैया कराएगी लेकिन यहां तो मामला एक दम उलट नजर आ रहा है।

यूपी में निवेशकों का कम आना
यूपी में निवेशकों की नाराजगी को देखते हुए सीएम योगी को बड़े एक्शन लेने की जरूरत है। दरअसल यूपी बहुत बड़ा मार्केट है। सैमसंग और इंट्रा टेक्नलॉजी लिमिटेड को छोड़ दिया जाये तो कोई भी बड़ी कंपनी अभी अपने प्लांट यहां नहीं लगाना चाहती। इसका सबसे बड़ा कारण पिछली सरकारों की ओर से प्रोत्साहन न मिलना है। हालांकि अब योगी सरकार निवेशकों को रिझाने के लिए लिए विशेष प्लान तैयार कर चुकी है। लेकिन देखना ये है कि ये प्लान किस हद तक सही तरीके से चल पाता है।
अब योगी सरकार इन चुनौतियों से किस तरह निपटेगी यह सरकार ही बता सकती है। हां लेकिन इतना जरूर है कि अगर सरकार दृढ़ शक्ति से चाह ले तो उसके लिए ये मुश्किलें आसन हो जाएंगी, लेकिन सरकार इन मुश्किलों से कैसे पार पाएगी यह सरकार ही जान सकती है।

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